A Tiny Seed, A Mortal Body
घुँघुँची भर के बोइये, उपजा पसेरी आठ। डेरा परा काल का, साँझ सकारे जात॥
Kabir observes that from just a tiny seed grows a body weighing many measures, yet the moment that body is born, death also makes its camp within it, and day by day it wastes away. This is nature's own law of cause and effect; those who fail to see this law drift toward mere materialism and lose their true selves.
बीज से देह, देह से काल
घुँघुँची भर के बोइये, उपजा पसेरी आठ। डेरा परा काल का, साँझ सकारे जात॥
थोड़े से बीज से बड़ा शरीर बन जाता है, पर जन्म लेते ही उसमें काल का डेरा भी पड़ जाता है — रात-दिन बीतते हुए शरीर क्षीण होता रहता है। यह कारण-कार्य का स्वाभाविक क्रम है; जो इसे नहीं समझते, वे भौतिकवादी दृष्टि में उलझकर स्वयं को खो बैठते हैं।
बीजातून देह, देहात काळ
घुँघुँची भर के बोइये, उपजा पसेरी आठ। डेरा परा काल का, साँझ सकारे जात॥
छोट्याशा बीजातून मोठे शरीर निर्माण होते, पण जन्म घेताच त्यात मृत्यूचाही ठिय्या पडतो — रात्रंदिवस उलटत शरीर क्षीण होत जाते. हा निसर्गाचा कार्यकारण-नियम आहे; जे हे समजत नाहीत, ते भौतिक दृष्टीत अडकून स्वतःला हरवतात.