Consciousness Without the Word
शब्द बिना सुरति आँधरी, कहो कहाँ को जाय। द्वार न पावै शब्द का, फिर-फिर भटका खाय॥
Without the true Word, consciousness remains blind — where, then, can it possibly go? Unable to find the door of the Word, it wanders astray again and again.
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शब्द बिना भटकाव
शब्द बिना सुरति आँधरी, कहो कहाँ को जाय। द्वार न पावै शब्द का, फिर-फिर भटका खाय॥
शब्द के बिना सुरति अंधी है, वह कहाँ जाए? शब्द का द्वार न मिलने पर वह बार-बार भटकती रहती है — सच्चे ज्ञान के बिना जीवन दिशाहीन रहता है।
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शब्दाशिवाय भरकटणे
शब्द बिना सुरति आँधरी, कहो कहाँ को जाय। द्वार न पावै शब्द का, फिर-फिर भटका खाय॥
शब्दाशिवाय सुरती आंधळी असते, ती कुठे जाणार? शब्दाचे द्वार न सापडल्याने ती वारंवार भरकटत राहते — खऱ्या ज्ञानाशिवाय जीवन दिशाहीन राहते.
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