Death Prowls Like a Butcher
लोग भरोसे कौन के, बैठे रहें उरगाय।जीय रही लूटत जम फिरे, मैँढ़ा लुटे कसाय॥
On whose assurance do people sit around so carelessly, like a grazing cow? Death wanders about looting life away, just as the butcher plunders the sheep — complacency in the face of mortality is folly.
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काल का शिकार
लोग भरोसे कौन के, बैठे रहें उरगाय।जीय रही लूटत जम फिरे, मैँढ़ा लुटे कसाय॥
लोग किसके भरोसे निश्चिंत बैठे हैं, जैसे गाय चरती रहती है? यम जीवन लूटता फिरता है, जैसे कसाई भेड़ों को लूटता है — मृत्यु के प्रति यह लापरवाही मूर्खता है।
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काळाची शिकार
लोग भरोसे कौन के, बैठे रहें उरगाय।जीय रही लूटत जम फिरे, मैँढ़ा लुटे कसाय॥
लोक कोणाच्या भरवशावर निश्चिंत बसले आहेत, जशी गाय चरत राहते? यम जीवन लुटत फिरतो, जसा कसाई मेंढ्यांना लुटतो — मृत्यूबाबतची ही बेफिकिरी मूर्खपणा आहे.
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