Eyes Dimmed Watching the Path
अंषड़ियाँ झाँई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि। जीभड़ियाँ छाला पड्या, राम पुकारि-पुकारि॥
Kabir describes the soul as a lovelorn woman who has watched the road for her Beloved so long that her eyes have grown dim and her sight has weakened. Calling out to Ram again and again, her very tongue has blistered. It is a vivid picture of the intensity of the soul's longing for union with God.
राह तकते-तकते धुंधली आँखें
अंषड़ियाँ झाँई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि। जीभड़ियाँ छाला पड्या, राम पुकारि-पुकारि॥
प्रियतम की राह देखते-देखते विरहिणी आत्मा की आँखों की ज्योति मंद पड़ गई है, और राम-राम पुकारते-पुकारते उसकी जीभ में छाले पड़ गए हैं — यह भक्त की तीव्र विरह-वेदना का चित्रण है।
वाट पाहून धूसर झालेले डोळे
अंषड़ियाँ झाँई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि। जीभड़ियाँ छाला पड्या, राम पुकारि-पुकारि॥
प्रियकराची वाट पाहत पाहत विरहिणी आत्म्याचे डोळे धूसर झाले आहेत, आणि रामाला हाक मारून मारून तिची जीभ फोडांनी भरली आहे — ही भक्ताच्या तीव्र विरह-वेदनेची प्रतिमा आहे.