Fire in the Ocean, Unseen
आगि जो लागि समुद्र में, धुवाँ न परगट होय।की जाने जो जरि मुवा, की जाकी लाई होय॥
If fire were to catch within the ocean, no smoke would ever appear on the surface. Who then would know if someone burned within, or who kindled that flame? A paradox pointing to inner suffering that shows no outward sign.
समुद्र में छिपी आग
आगि जो लागि समुद्र में, धुवाँ न परगट होय।की जाने जो जरि मुवा, की जाकी लाई होय॥
समुद्र में आग लगे तो धुआँ बाहर नहीं दिखता। कौन जाने कि भीतर कोई जल मरा, या किसने आग लगाई — यह उलटबांसी भीतरी विरह-वेदना की अदृश्यता की ओर संकेत करती है।
सागरात लपलेली आग
आगि जो लागि समुद्र में, धुवाँ न परगट होय।की जाने जो जरि मुवा, की जाकी लाई होय॥
सागरात आग लागली तर धूर बाहेर दिसत नाही. कोणाला कळणार आतून कोण जळून मेले, किंवा कोणी आग लावली — ही उलटबासी आतील विरहवेदनेच्या अदृश्यतेकडे इशारा करते.