Like Salt Dissolved in Flour
कबीर गुर गरवा मिल्या, रलि गया आटैं लूंण। जाति पाँति कुल सब मिटे, नाँव धरौगे कौंण॥
Kabir says that upon meeting his great Guru, he merged into him completely, the way salt dissolves invisibly into flour. All his distinctions of caste, lineage, and family fell away — so what name or label could anyone possibly attach to him now?
आटे में नमक-सा विलय
कबीर गुर गरवा मिल्या, रलि गया आटैं लूंण। जाति पाँति कुल सब मिटे, नाँव धरौगे कौंण॥
कबीर कहते हैं कि महान सतगुरु से मिलकर वे उसी में इस तरह घुल-मिल गए जैसे आटे में नमक मिल जाता है, अलग पहचाना नहीं जाता। जाति, कुल, गोत्र सब मिट गए — अब कोई उन्हें किस नाम से पुकारे?
पिठात मीठ विरघळले तसे
कबीर गुर गरवा मिल्या, रलि गया आटैं लूंण। जाति पाँति कुल सब मिटे, नाँव धरौगे कौंण॥
कबीर म्हणतात, थोर सद्गुरूंना भेटल्यावर ते त्यांच्यात असे मिसळून गेले जसे पिठात मीठ मिसळते आणि वेगळे ओळखता येत नाही. जात, कुळ, वंश सर्व मिटले — आता त्यांना कोणत्या नावाने हाक मारावी?