No Return to the Marketplace
दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट। पूरा किया विसाहुणां, बहुरि न आँवौं हट्ट॥
The Guru filled Kabir's lamp with oil and gave it an everlasting, unbreakable wick, completing the exchange so perfectly that Kabir need never come back to this marketplace again. It speaks of a spiritual transaction — faith and grace — so complete that the soul is freed from ever returning to the cycle of birth and death.
फिर न आना हाट में
दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट। पूरा किया विसाहुणां, बहुरि न आँवौं हट्ट॥
गुरु ने दीपक में तेल भरकर उसमें एक ऐसी अघट्ट (अटूट) बाती लगा दी जो कभी बुझती नहीं। यह सौदा इतना पूरा और सच्चा हुआ कि अब जीव को इस संसार-रूपी हाट में बार-बार लौटकर आने की आवश्यकता नहीं — अर्थात जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल गई।
पुन्हा बाजारात यायचे नाही
दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट। पूरा किया विसाहुणां, बहुरि न आँवौं हट्ट॥
गुरूंनी दिव्यात तेल भरून त्यात कधीही न विझणारी वात घातली. हा सौदा इतका पूर्ण झाला की आता जीवाला या संसाररूपी बाजारात पुन्हा यावे लागणार नाही — म्हणजेच जन्म-मृत्यूच्या फेऱ्यातून मुक्ती मिळाली.