Only Discernment Keeps One Afloat
मन सायर मनसा लहरि, बूड़े बहुत अचेत। कहहिं कबीर ते बाँचि हैं, चाके हृदय विवेक॥
The mind is like an ocean, and the countless desires and fancies it produces are its waves; many careless people have drowned in them. Kabir says that only those whose hearts hold the power to discern truth from falsehood, self from other, will be saved from drowning.
विवेक ही बचाता है डूबने से
मन सायर मनसा लहरि, बूड़े बहुत अचेत। कहहिं कबीर ते बाँचि हैं, चाके हृदय विवेक॥
मन समुद्र है और उससे उठने वाली नाना इच्छाएँ-कल्पनाएँ उसकी लहरें हैं, जिनमें बहुत असावधान लोग डूब गए हैं। कबीर कहते हैं कि जिसके हृदय में सत्य-असत्य और स्व-पर को परखने की शक्ति होगी, वही इनसे बचेगा।
विवेकच बुडण्यापासून वाचवतो
मन सायर मनसा लहरि, बूड़े बहुत अचेत। कहहिं कबीर ते बाँचि हैं, चाके हृदय विवेक॥
मन समुद्र आहे आणि त्यातून उठणाऱ्या अगणित इच्छा-कल्पना त्याच्या लाटा आहेत, ज्यात अनेक बेसावध लोक बुडाले आहेत. कबीर म्हणतात, ज्याच्या हृदयात सत्य-असत्य आणि स्व-पर ओळखण्याची शक्ती असेल, तोच यातून वाचेल.