Rare as Diamonds, Rare as Sandalwood
हीरों की ओबरी नहीं, मलयागिरि नहिं पाँत। सिंहों के लेहँड़ा नहीं, साधु न चले जमात॥
There is no storeroom overflowing with the finest diamonds, no long rows of sandalwood trees, no herds of lions roaming together -- and likewise, truly enlightened saints never move about in crowds. What is truly precious is always rare, never abundant.
हीरे और साधु दुर्लभ ही होते हैं
हीरों की ओबरी नहीं, मलयागिरि नहिं पाँत। सिंहों के लेहँड़ा नहीं, साधु न चले जमात॥
जैसे उत्तम हीरों से भरी कोठरी नहीं होती, पंक्तियों में मलयगिरि चंदन के पेड़ नहीं होते और सिंहों के झुंड नहीं होते, वैसे ही सच्चे पूर्णत्व प्राप्त संत भी कभी भीड़ में नहीं मिलते -- जो सचमुच श्रेष्ठ है, वह सदा दुर्लभ ही होता है।
हिरे आणि साधू दुर्मिळच असतात
हीरों की ओबरी नहीं, मलयागिरि नहिं पाँत। सिंहों के लेहँड़ा नहीं, साधु न चले जमात॥
जशी उत्तम हिऱ्यांनी भरलेली खोली नसते, रांगेने चंदनाची झाडे नसतात आणि सिंहांचे कळप नसतात, तसेच खरे पूर्णत्व प्राप्त साधूही कधी गर्दीत आढळत नाहीत -- जे खरोखर श्रेष्ठ असते, ते नेहमीच दुर्मिळ असते.