Standing at the Roadside, Asking Every Traveler
बिरहिन ऊभी पंथ सिरि, पंथी बूझै धाइ। एक सबद कहि पीव का, कवर मिलैंगे आइ॥
The separated soul stands at the crossroads, eagerly running up to ask every passerby for news of her Beloved. Speak just a single word about him, she begs them; tell me when he will come and meet me.
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राह पर खड़ी, हर राहगीर से पूछती
बिरहिन ऊभी पंथ सिरि, पंथी बूझै धाइ। एक सबद कहि पीव का, कवर मिलैंगे आइ॥
विरहिणी आत्मा राह के मुहाने पर खड़ी होकर हर राहगीर से दौड़कर पूछती है — मेरे प्रियतम की एक बात तो बताओ, वे कब आकर मिलेंगे। यह ईश्वर-मिलन की व्याकुल प्रतीक्षा है।
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वाटेवर उभी राहून प्रत्येक वाटसरूला विचारते
बिरहिन ऊभी पंथ सिरि, पंथी बूझै धाइ। एक सबद कहि पीव का, कवर मिलैंगे आइ॥
विरहिणी आत्मा वाटेच्या तोंडाशी उभी राहून प्रत्येक वाटसरूकडे धावत जाऊन विचारते — माझ्या प्रियकराबद्दल एक तरी शब्द सांगा, ते कधी येऊन भेटतील. ही ईश्वर-भेटीची व्याकुळ प्रतीक्षा आहे.
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