The Bee Lost Among Flowers
भँवर बिलंबे बाग में, बहु फूलन की बास। ऐसे जीव बिलंबे विषय में, अन्तहु चले निरास॥
Just as a bee loses itself wandering among the many fragrant flowers of a garden, the soul becomes attached to worldly pleasures and forgets its true self. In the end, it must leave this world disappointed and empty-handed.
फूलों में भूला भँवरा
भँवर बिलंबे बाग में, बहु फूलन की बास। ऐसे जीव बिलंबे विषय में, अन्तहु चले निरास॥
जैसे भँवरा बाग में फूलों की सुगंध में भूल जाता है, वैसे ही जीव संसार के विषयों में आसक्त होकर स्वयं को भूल जाता है और अंत में निराश होकर संसार से जाना पड़ता है।
फुलांत हरवलेला भुंगा
भँवर बिलंबे बाग में, बहु फूलन की बास। ऐसे जीव बिलंबे विषय में, अन्तहु चले निरास॥
जसा भुंगा बागेतील फुलांच्या सुगंधात हरवून जातो, तसाच जीव जगाच्या विषयांत आसक्त होऊन स्वतःला विसरतो आणि शेवटी निराश होऊन या जगातून जावे लागते.