The Boat Without a True Guide
ताकी पूरी क्यों परे, जाके गुरु न लाखई बाट। ताके बेड़ा बूड़ि हैं, फिरि-फिरि औघट घाट॥
How can a person find true welfare if their guru has never shown them the right path? Such a person's boat will sink again and again at treacherous crossings, and they will keep sliding further down the path of ruin.
बिना मार्गदर्शक डूबती नाव
ताकी पूरी क्यों परे, जाके गुरु न लाखई बाट। ताके बेड़ा बूड़ि हैं, फिरि-फिरि औघट घाट॥
जिस व्यक्ति को सद्गुरु ने सच्चा रास्ता नहीं दिखाया, उसका कल्याण कैसे हो सकता है। उसकी नाव बार-बार कुघाट में डूबती है और वह उत्तरोत्तर पतन की ओर बढ़ता जाता है।
मार्गदर्शकाविना बुडणारी नाव
ताकी पूरी क्यों परे, जाके गुरु न लाखई बाट। ताके बेड़ा बूड़ि हैं, फिरि-फिरि औघट घाट॥
ज्या व्यक्तीला सद्गुरूंनी खरा मार्ग दाखवला नाही, त्याचे कल्याण कसे होणार? त्याची नाव वारंवार चुकीच्या घाटावर बुडते आणि तो अधिकाधिक अधःपतनाकडे जातो.