The Bowl of Sweetness Waiting
हाथ कटोरा खोवा भरा, मग जोवत दिन जाय। कबीर उतरा चित्त से, छाँछ दियो नहिं जाय॥
Like someone who holds a bowl filled with sweet khoya, watching the road all day hoping to feed it lovingly to a dear one on arrival, but who loses all desire to give even plain buttermilk once that person falls from favor through misconduct, so too does a true guru wait eagerly to share deep wisdom with a sincere seeker. But once a disciple strays through bad conduct and falls from the guru's regard, even ordinary guidance is withheld, let alone the treasure of true knowledge.
प्रीत उतरने पर मट्ठा भी नहीं
हाथ कटोरा खोवा भरा, मग जोवत दिन जाय। कबीर उतरा चित्त से, छाँछ दियो नहिं जाय॥
जैसे कोई प्रिय की राह देखते हुए खोए से भरा कटोरा लिए रहता है, पर प्रिय के दुराचरण से मन उतर जाए तो मट्ठा देने की भी इच्छा नहीं रहती -- वैसे ही सद्गुरु जिज्ञासु की राह देखते रहते हैं, पर शिष्य के दुराचरण से गुरु के चित्त से उतर जाने पर उसे साधारण सीख देने की भी इच्छा नहीं रहती।
प्रीती उतरल्यावर ताकही नाही
हाथ कटोरा खोवा भरा, मग जोवत दिन जाय। कबीर उतरा चित्त से, छाँछ दियो नहिं जाय॥
जसा कोणी प्रियजनाची वाट पाहत गोड खव्याने भरलेला वाडगा घेऊन बसतो, पण त्याच्या दुर्वर्तनामुळे मन उतरले तर ताक द्यायचीही इच्छा राहत नाही -- तसेच सद्गुरू जिज्ञासूची वाट पाहत असतात, पण शिष्याच्या दुर्वर्तनामुळे गुरूच्या मनातून तो उतरला तर साधी शिकवणही देण्याची इच्छा राहत नाही.