The Endless Line of Ants
बेटा जाए क्या हुआ, कहा बजावै थाल।आवन जावन ह्वै रहा, ज्यौं कीड़ी का नाल॥
What great thing has happened that you beat the celebratory plate at a son's birth? Life's coming and going continues endlessly, like an unbroken line of ants marching on.
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कीड़ी की कतार-सा जीवन
बेटा जाए क्या हुआ, कहा बजावै थाल।आवन जावन ह्वै रहा, ज्यौं कीड़ी का नाल॥
बेटा जन्मा तो इतना क्या हो गया कि थाल बजाकर उत्सव मनाते हो? यह आना-जाना तो कीड़ी की कतार की तरह अनवरत चलता ही रहता है — जन्म-मृत्यु का चक्र स्वाभाविक है, इसमें अहंकार व्यर्थ है।
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मुंग्यांच्या रांगेसारखे जीवन
बेटा जाए क्या हुआ, कहा बजावै थाल।आवन जावन ह्वै रहा, ज्यौं कीड़ी का नाल॥
मुलगा जन्मला म्हणून एवढा काय आनंद साजरा करता थाळी वाजवून? हे येणे-जाणे मुंग्यांच्या रांगेसारखे अखंड चालूच राहते — जन्म-मृत्यूचे चक्र स्वाभाविक आहे, त्यात अहंकार व्यर्थ आहे.
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