The Falling Leaf's Farewell
पात झरंता यों कहै, सुनि तरवर बनराइ।अब के बिछुड़े ना मिलैं, कहुँ दूर पड़ैंगे जाइ॥
The falling leaf speaks these words, listen O forest of trees: once we part today, we shall not meet again — we shall fall far apart from one another, scattered by the wind.
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पत्ते की विदाई
पात झरंता यों कहै, सुनि तरवर बनराइ।अब के बिछुड़े ना मिलैं, कहुँ दूर पड़ैंगे जाइ॥
झरता हुआ पत्ता कहता है, सुनो वन के वृक्षों — अब बिछुड़े तो फिर कभी न मिलेंगे, दूर-दूर जा गिरेंगे। यह जीवन के क्षणभंगुर संबंधों और वियोग की मार्मिक झलक है।
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पानाचा निरोप
पात झरंता यों कहै, सुनि तरवर बनराइ।अब के बिछुड़े ना मिलैं, कहुँ दूर पड़ैंगे जाइ॥
गळणारे पान म्हणते, ऐका वनातील वृक्षांनो — आता विभक्त झालो तर पुन्हा भेटणार नाही, दूर दूर जाऊन पडू. हे जीवनातील क्षणभंगुर नात्यांचे आणि विरहाचे मार्मिक चित्रण आहे.
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