The Fire That Frees the Soul-Bird
लाई लावनहार की, जाकी लाई पर जरे। बलिहारी लावनहार की, छप्पर बाँचे घर जरे॥
The fire of knowledge that a true guru kindles in the seeker's heart burns away the wings of worldly attachment, so the soul, like a bird, stops flying restlessly toward worldly objects. Kabir praises the guru who lights this fire — in it the thatched roof survives while the house burns, meaning the soul is saved even as the false home of ego and worldly attachment is destroyed.
जो घर जलाए, जीव बचाए
लाई लावनहार की, जाकी लाई पर जरे। बलिहारी लावनहार की, छप्पर बाँचे घर जरे॥
सद्गुरु की लगाई हुई ज्ञान की आग साधक के भीतर माया की आसक्ति और राग-द्वेष के पंख जला देती है, जिससे जीव-पक्षी का संसार में भटकना बंद हो जाता है। इस आग में छप्पर बच जाता है पर घर जल जाता है — अर्थात जीव का उद्धार होता है और अहंता-ममता नष्ट हो जाती है।
जो घर जाळतो, जीव वाचवतो
लाई लावनहार की, जाकी लाई पर जरे। बलिहारी लावनहार की, छप्पर बाँचे घर जरे॥
सद्गुरूंनी लावलेली ज्ञानाग्नी साधकाच्या मनातील मायेची आसक्ती आणि राग-द्वेषाचे पंख जाळून टाकते, त्यामुळे जीवरूपी पक्षी जगात भटकणे थांबते. या आगीत छप्पर वाचते पण घर जळते — म्हणजे जीवाचा उद्धार होतो आणि अहंकार-ममता नष्ट होते.