The Guru's Polishing Craft
गुरु सिकलीगर कीजिये, मनहि मस्कला देय। शब्द छोलना छोलिके, चित दर्पण करि लेय॥
Kabir compares the true guru to a metal-polisher who scrapes off rust and grime to make dull metal shine. In the same way, one should take refuge in a guru who scrapes away delusion and impurity from the mind with the tool of discerning words, until the heart becomes clear and reflective like a mirror.
गुरु रूपी सिकलीगर
गुरु सिकलीगर कीजिये, मनहि मस्कला देय। शब्द छोलना छोलिके, चित दर्पण करि लेय॥
जैसे सिकलीगर धातु को माँजकर चमका देता है, वैसे ही सच्चे सद्गुरु की शरण लो जो विवेक की मशक्का लगाकर, ज्ञान के औजार से मन का मैल और आवरण छीलकर चित्त को दर्पण जैसा निर्मल बना दे।
गुरु नावाचा पैलूपाडणारा
गुरु सिकलीगर कीजिये, मनहि मस्कला देय। शब्द छोलना छोलिके, चित दर्पण करि लेय॥
ज्याप्रमाणे कारागीर धातू घासून चकाकवतो, त्याचप्रमाणे खऱ्या सद्गुरूचा आश्रय घ्या, जो विवेकाच्या साहाय्याने मनावरील मळ आणि आवरण दूर करून चित्त आरशासारखे निर्मळ बनवतो.