The Helpless Path
राह बिचारी क्या करे, जो पंथि न चले बिचार। आपन मारग छोड़ि के, फिरे उजार-उजार॥
Kabir says the right path itself is helpless if the traveler refuses to walk it with thought and care, choosing instead to abandon it and wander aimlessly through the wilderness. The teaching, however true, cannot help someone who will not follow it with understanding.
बेचारी राह क्या करे
राह बिचारी क्या करे, जो पंथि न चले बिचार। आपन मारग छोड़ि के, फिरे उजार-उजार॥
अच्छी राह बेचारी क्या करे, जब पथिक ही विचारपूर्वक उस पर नहीं चलता और अपना सही मार्ग छोड़कर वीराने में भटकता फिरता है। दोष रास्ते का नहीं, भटकने वाले का है।
बिचारी वाट काय करणार
राह बिचारी क्या करे, जो पंथि न चले बिचार। आपन मारग छोड़ि के, फिरे उजार-उजार॥
चांगली वाट तरी बिचारी काय करणार, जेव्हा वाटसरूच विचारपूर्वक तिच्यावर चालत नाही आणि आपला योग्य मार्ग सोडून ओसाड रानात भटकत राहतो. दोष वाटेचा नसून भरकटणाऱ्याचा आहे.