The Mad Elephant and the Hawk of Desire
मन मतंग गइयर हने, मनसा भई सचान। जंत्र-मंत्र माने नहीं, लागी उड़ि-उड़ि खान॥
The mind is like a wild, intoxicated elephant that keeps striking down the soul, its own rider. Desires are like hawks that swoop down again and again to devour a person. Neither the mind's fury nor desire's hunger can be tamed by any charm or magical spell.
उन्मत्त हाथी और बाज की इच्छाएं
मन मतंग गइयर हने, मनसा भई सचान। जंत्र-मंत्र माने नहीं, लागी उड़ि-उड़ि खान॥
मन उन्मत्त हाथी के समान है जो अपने ही सवार जीव-महावत को मारता रहता है, और इच्छाएं बाज पक्षी की तरह बार-बार झपटकर मनुष्य को खा जाती हैं। इन पर किसी जंत्र-मंत्र का कोई असर नहीं होता।
उन्मत्त हत्ती आणि ससाण्याच्या इच्छा
मन मतंग गइयर हने, मनसा भई सचान। जंत्र-मंत्र माने नहीं, लागी उड़ि-उड़ि खान॥
मन उन्मत्त हत्तीसारखे आहे, जो स्वतःच्याच माहुताला म्हणजे जीवाला मारत राहतो, आणि इच्छा ससाण्यासारख्या वारंवार झेप घेऊन माणसाला गिळंकृत करतात. यावर कोणत्याही मंत्र-तंत्राचा परिणाम होत नाही.