The Ocean Is Everywhere
पानि पियावत क्या फिरो, घर-घर सायर बारि।तृषावन्त जो होयगा, पीवगा झख मारि॥
Why go wandering from door to door offering water, when the vast ocean's waters lie everywhere? Whoever is truly thirsty will find their own way to drink.
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सागर तो चारों ओर है
पानि पियावत क्या फिरो, घर-घर सायर बारि।तृषावन्त जो होयगा, पीवगा झख मारि॥
घर-घर पानी पिलाने क्यों फिरते हो, जब सागर का जल हर जगह मौजूद है? जिसे सच्ची प्यास होगी, वह स्वयं ही पीने का उपाय खोज लेगा — सत्य की तलाश स्वयं करनी पड़ती है, थोपी नहीं जा सकती।
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सागर तर सर्वत्र आहे
पानि पियावत क्या फिरो, घर-घर सायर बारि।तृषावन्त जो होयगा, पीवगा झख मारि॥
घरोघरी पाणी पाजायला का फिरता, जेव्हा सागराचे पाणी सर्वत्र आहे? ज्याला खरी तहान असेल, तो स्वतःच पिण्याचा मार्ग शोधेल — सत्याचा शोध स्वतःच घ्यावा लागतो, तो लादता येत नाही.
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