The Teaching No One Trusts
जाके मुनिवर तप करें, वेद थके गुण गाय। सोई देउँ सिखापना, कोई नहीं पतियाय॥
Kabir says he teaches the very truth that great sages toiled through austerities to attain, and whose infinite glory even the Vedas fall short of praising. Yet, though he offers this supreme knowledge freely, hardly anyone believes him.
मुनियों की तपस्या का सार
जाके मुनिवर तप करें, वेद थके गुण गाय। सोई देउँ सिखापना, कोई नहीं पतियाय॥
जिस स्वरूपज्ञान और मोक्ष के लिए बड़े-बड़े मुनियों ने तप किया और जिसके गुण गाते-गाते वेद भी थक गए, कबीर वही परम सत्य सिखाते हैं -- फिर भी कोई उस पर विश्वास नहीं करता।
मुनींच्या तपश्चर्येचे सार
जाके मुनिवर तप करें, वेद थके गुण गाय। सोई देउँ सिखापना, कोई नहीं पतियाय॥
ज्या स्वरूपज्ञानासाठी आणि मोक्षासाठी मोठमोठ्या मुनींनी तपश्चर्या केली आणि ज्याचे गुणगान करता करता वेदही थकले, तेच परम सत्य कबीर शिकवतात -- तरीही कोणी त्यावर विश्वास ठेवत नाही.