The Water-Carrier's Steady Mind
सुमिरन की सुधि यों करो, ज्यों गागर पनिहार।हौले-डौले सुरत में, कहै कबीर विचार।।
Keep remembrance of God the way a water-carrier woman keeps the pot balanced on her head — swaying and walking through her daily chores, her attention never leaves the pot. Kabir says: let devotion flow just as steadily through all of life's activity.
गागर उठाए पनिहारिन-सा स्मरण
सुमिरन की सुधि यों करो, ज्यों गागर पनिहार।हौले-डौले सुरत में, कहै कबीर विचार।।
स्मरण वैसे ही रखो जैसे पनिहारिन सिर पर गागर लिए चलती है — डोलते-हिलते हुए भी उसका ध्यान गागर पर ही रहता है। कबीर कहते हैं, भक्ति भी रोज़मर्रा के कामों के बीच ऐसे ही अटूट रहनी चाहिए।
गाडगे घेऊन जाणाऱ्या पाणकरणीसारखे स्मरण
सुमिरन की सुधि यों करो, ज्यों गागर पनिहार।हौले-डौले सुरत में, कहै कबीर विचार।।
स्मरण असेच ठेवा जसे पाणकरीण डोक्यावर गाडगे घेऊन चालते — डोलत डुलत असतानाही तिचे लक्ष गाडग्यावरच असते. कबीर म्हणतात, भक्तीही दैनंदिन कामांमध्ये अशीच अखंड राहायला हवी.