The World's Dream, the Word's Truth
मूवा है मरि जाहुगे, मुये कि बाजी ढोल। सपन सनेही जग भया, सहिदानी रहिगौ बोल॥
You are as good as dead already, and dead you will surely become — does the celebratory drum still play once you are gone? The world's affection is but a passing dream; only the true Word remains as the lasting testimony.
स्वप्न-सा संसार, शेष रहे बोल
मूवा है मरि जाहुगे, मुये कि बाजी ढोल। सपन सनेही जग भया, सहिदानी रहिगौ बोल॥
तू मरा हुआ ही है और मरेगा भी, फिर मरने पर ढोल बजाने से क्या लाभ? यह संसार स्वप्न जैसा साथी है, अंत में केवल (सतगुरु का) शब्द ही सच्ची निशानी बनकर रह जाता है।
स्वप्नवत जग, उरतो फक्त शब्द
मूवा है मरि जाहुगे, मुये कि बाजी ढोल। सपन सनेही जग भया, सहिदानी रहिगौ बोल॥
तू आधीच मेलेला आहेस आणि मरणारही आहेस, मग मेल्यावर ढोल वाजवण्याचा काय उपयोग? हे जग स्वप्नासारखा सोबती आहे, शेवटी फक्त (सद्गुरूंचा) शब्दच खरी खूण म्हणून उरतो.