The Worth of Good Company
कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय। खीर खांड भोजन मिलै, साकट संग न जाय॥
Kabir says: it is better to keep company with saints and eat nothing but barley husk, than to enjoy kheer and sugar in the company of the irreligious. The quality of one's company matters far more than material comfort.
साधु संग की महिमा
कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय। खीर खांड भोजन मिलै, साकट संग न जाय॥
कबीर कहते हैं, साधु के संग में जौ की भूसी खाना भी अच्छा है, बनिस्बत साकट (अधर्मी) के संग में खीर-खांड का भोजन मिलने के। सत्संग का महत्व भौतिक सुख-सुविधा से कहीं अधिक है।
साधुसंगतीचा महिमा
कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय। खीर खांड भोजन मिलै, साकट संग न जाय॥
कबीर म्हणतात, साधूच्या संगतीत जव्याचा कोंडा खाणेही चांगले, साकट (अधर्मी) च्या संगतीत खीर-साखरेचे भोजन मिळण्यापेक्षा. सत्संगाचे महत्त्व भौतिक सुखसोयींपेक्षा खूप अधिक आहे.