Trapped in Inherited Belief
अपने अपने शिरों का, सबन लीन्ह है मान। हरि की बात दुरन्तरी, परी न काहू जान॥
Nearly everyone in the world accepts the teachings of their own tradition and sect without ever examining them closely, taking pride in what they were simply handed. Because of this, the deep and true words of the divine become extremely hard for them to grasp — one cannot understand truth by merely following inherited custom.
परंपरा में बँधा विश्वास
अपने अपने शिरों का, सबन लीन्ह है मान। हरि की बात दुरन्तरी, परी न काहू जान॥
संसार के प्राय: सभी लोग बिना परख किए अपनी-अपनी परंपरा और संप्रदाय की बातों को मान लेते हैं, इसलिए उनके लिए यथार्थ ज्ञान की बातें समझना अत्यंत कठिन हो जाता है — केवल परंपरावादी बनकर कोई सत्य नहीं समझ सकता।
परंपरेत बांधलेला विश्वास
अपने अपने शिरों का, सबन लीन्ह है मान। हरि की बात दुरन्तरी, परी न काहू जान॥
जगातील बहुतेक सर्व लोक न पारखताच आपापल्या परंपरेच्या आणि संप्रदायाच्या गोष्टी मान्य करतात, त्यामुळे त्यांना खऱ्या ज्ञानाच्या गोष्टी समजणे अत्यंत कठीण होते — केवळ परंपरावादी बनून कोणीही सत्य समजू शकत नाही.