Two and a Half Letters of Love
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।
The world exhausted itself reading scripture after scripture, yet none became truly wise. Whoever reads and understands the two-and-a-half letters that spell 'prem' (love) becomes the true pandit.
प्रेम के ढाई अक्षर
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।
पोथियाँ पढ़-पढ़कर संसार समाप्त हो गया, पर कोई सच्चा पंडित नहीं बना। जो प्रेम के ढाई अक्षर पढ़ ले और समझ ले, वही असली विद्वान है — शास्त्रज्ञान से बड़ा है प्रेम का अनुभव।
प्रेमाची अडीच अक्षरे
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।
पोथ्या वाचून वाचून जग संपले, पण कोणी खरा पंडित झाला नाही. जो प्रेमाची अडीच अक्षरे वाचून समजून घेतो, तोच खरा विद्वान — शास्त्रज्ञानापेक्षा प्रेमाचा अनुभव मोठा आहे.