When All Four Eyes Are Lost
ऊपर की दोऊ गई, हियहु की गई हेराय। कहहिं कबीर जाकी चारिउ गई, ताको काह उपाय॥
A person may have two outer eyes yet not walk the path of truth and good conduct, and if the inner eyes of the heart, discernment and reflection, are also lost, then, says Kabir, when all four eyes are gone, what hope remains for that person's welfare?
जब चारों नेत्र खो जाएँ
ऊपर की दोऊ गई, हियहु की गई हेराय। कहहिं कबीर जाकी चारिउ गई, ताको काह उपाय॥
जिसकी दो बाहरी आँखें होकर भी वह सत्य और सदाचार की राह पर नहीं चलता, और जिसके हृदय की विवेक-दृष्टि रूपी भीतरी आँखें भी नष्ट हो चुकी हैं, कबीर कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति के, जिसकी चारों आँखें जाती रहीं, कल्याण का कोई उपाय शेष नहीं रहता।
चारही डोळे हरवल्यावर
ऊपर की दोऊ गई, हियहु की गई हेराय। कहहिं कबीर जाकी चारिउ गई, ताको काह उपाय॥
ज्याला दोन बाह्य डोळे असूनही तो सत्य आणि सदाचाराच्या मार्गाने चालत नाही, आणि ज्याच्या हृदयातील विवेकदृष्टीरूपी आतले डोळेही नष्ट झाले आहेत, कबीर म्हणतात की अशा माणसाच्या कल्याणाचा आता कोणताच उपाय उरत नाही.