Pride Vanishes in an Instant
मा कुरु धनजनयौवनगर्वं हरति निमेषात्कालः सर्वम् । मायामयमिदमखिलं हित्वा ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा ॥ १२ ॥
Do not take pride in wealth, kinsmen, or youth — time sweeps all of it away in the blink of an eye. Abandon this entire world of illusion, and having realized this, enter the state of Brahman.
पल भर में मिटता अहंकार
मा कुरु धनजनयौवनगर्वं हरति निमेषात्कालः सर्वम् । मायामयमिदमखिलं हित्वा ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा ॥ १२ ॥
धन, स्वजन और यौवन का अहंकार मत कर — काल पलक झपकते ही सब कुछ हर लेता है। इस संपूर्ण मायामय संसार को त्यागकर, इसे जानकर, तू ब्रह्मपद में प्रवेश कर।
क्षणात विरणारा गर्व
मा कुरु धनजनयौवनगर्वं हरति निमेषात्कालः सर्वम् । मायामयमिदमखिलं हित्वा ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा ॥ १२ ॥
धन, स्वजन आणि तारुण्याचा गर्व करू नकोस — काळ पापणी लवते न लवते तोच सर्व काही हिरावून घेतो. हे संपूर्ण मायामय जग त्यागून, हे जाणून, तू ब्रह्मपदात प्रवेश कर.