Two Natures of Creation
द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च । दैवो विस्तरश: प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ॥ 6॥
There are two types of created beings in this world — the divine and the demoniac. The divine has been described at length; now hear from Me about the demoniac, O Partha.
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सृष्टि की दो प्रकृतियाँ
द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च । दैवो विस्तरश: प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ॥ 6॥
इस लोक में प्राणियों की दो सृष्टियाँ हैं — दैवी और आसुरी। दैवी सृष्टि का विस्तार से वर्णन किया जा चुका है; हे पार्थ, अब आसुरी सृष्टि के बारे में मुझसे सुनो।
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सृष्टीचे दोन स्वभाव
द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च । दैवो विस्तरश: प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ॥ 6॥
या जगात प्राण्यांच्या दोन सृष्टी आहेत — दैवी आणि आसुरी. दैवी सृष्टीचे विस्ताराने वर्णन केले गेले आहे; हे पार्था, आता आसुरी सृष्टीबद्दल माझ्याकडून ऐक.
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