Attaining Perfection Through One's Own Work
यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानव: ॥ 46॥
By worshipping, through one's own natural duty, that Being from whom all creatures arise and by whom this entire universe is pervaded, a person attains perfection.
स्वकर्म से सिद्धि-प्राप्ति
यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानव: ॥ 46॥
जिससे सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है और जिससे यह संपूर्ण जगत व्याप्त है, उसी परमात्मा की अपने स्वाभाविक कर्म के द्वारा आराधना करके मनुष्य सिद्धि प्राप्त करता है।
स्वकर्माने सिद्धिप्राप्ती
यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानव: ॥ 46॥
ज्यापासून सर्व प्राण्यांची उत्पत्ती होते आणि ज्याने हे संपूर्ण विश्व व्यापलेले आहे, त्याच परमात्म्याची आपल्या स्वाभाविक कर्माद्वारे आराधना करून मनुष्य सिद्धी प्राप्त करतो.