Rajasic Happiness: Nectar to Poison
विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम् । परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम् ॥ 38॥
The happiness that arises from the contact of the senses with their objects — sweet like nectar at first but bitter like poison in the end — is known as rajasic happiness.
pocketpage.in
राजसिक सुख
विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम् । परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम् ॥ 38॥
जो सुख इंद्रियों और विषयों के संयोग से उत्पन्न होता है, जो आरंभ में अमृत के समान परंतु परिणाम में विष के समान होता है, वही राजसिक सुख कहलाता है।
pocketpage.in
राजसिक सुख
विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम् । परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम् ॥ 38॥
जे सुख इंद्रिये आणि विषय यांच्या संयोगातून निर्माण होते, जे सुरुवातीला अमृतासारखे पण शेवटी विषासारखे असते, तेच राजसिक सुख होय.
pocketpage.in