॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ । पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥
Young, endowed with beauty, delicate yet immensely strong, their eyes wide as lotus petals, clad in bark garments and black deerskins—
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॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ । पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥
तरुण, रूपसंपन्न, सुकुमार किंतु महाबली, पुण्डरीक के समान विशाल नेत्रों वाले, वल्कल और कृष्णमृगचर्म धारण किए हुए—
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॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ । पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥
तरुण, रूपसंपन्न, सुकुमार पण महाबली, पुंडरीकासारखे विशाल डोळे असलेले, वल्कले व काळ्या मृगचर्माची वस्त्रे परिधान केलेले—
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