॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥
I remember the feet of Sri Ramachandra with my mind. I praise the feet of Sri Ramachandra with my words. I bow my head to the feet of Sri Ramachandra. I surrender and take refuge at the feet of Sri Ramachandra.
॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥
श्रीरामचंद्र के चरणों का मैं मन से स्मरण करता हूँ। श्रीरामचंद्र के चरणों का मैं वाणी से गुणगान करता हूँ। श्रीरामचंद्र के चरणों में मैं शीश नवाता हूँ। श्रीरामचंद्र के चरणों की मैं शरण लेता हूँ।
॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥
श्रीरामचंद्रांच्या चरणांचे मी मनाने स्मरण करतो. श्रीरामचंद्रांच्या चरणांचे मी वाणीने गुणगान करतो. श्रीरामचंद्रांच्या चरणी मी मस्तक नमवतो. श्रीरामचंद्रांच्या चरणांची मी शरण घेतो.