॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
करौ सीतापति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित् । मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥
May Sita's husband protect my hands; may the one who vanquished Parashurama protect my heart; may the destroyer of the demon Khara protect my waist; may the refuge of Jambavan protect my navel.
॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
करौ सीतापति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित् । मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥
सीतापति मेरे हाथों की रक्षा करें; परशुराम को जीतने वाले मेरे हृदय की रक्षा करें; खर के संहारक मेरी कमर की रक्षा करें; जाम्बवान के आश्रयदाता मेरी नाभि की रक्षा करें।
॥ श्री राम रक्षा स्तोत्र ॥
करौ सीतापति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित् । मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥
सीतापती माझ्या हातांचे रक्षण करोत; परशुरामांना जिंकणारे माझ्या हृदयाचे रक्षण करोत; खराचा नाश करणारे माझ्या कमरेचे रक्षण करोत; जांबवंतांचे आश्रयदाते माझ्या नाभीचे रक्षण करोत.