A King in Name Alone
अहं च त्वं च राजेन्द्र लोकनाथावुभावपि । बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठीतत्पुरुषो भवान् ॥
O great king, both of us are called 'lord of the world' — but the words mean very different things. For you it is a straightforward claim of ownership, the ruler who actually possesses the world; for me it means only that the world is the sole 'lord' I answer to, having nothing else of my own. It's a witty reminder that identical titles can hide vastly different realities.
शब्दों का भेद
अहं च त्वं च राजेन्द्र लोकनाथावुभावपि । बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठीतत्पुरुषो भवान् ॥
हे राजन, हम दोनों को 'लोकनाथ' कहा जाता है, पर इसका अर्थ अलग-अलग है—आप वास्तव में संसार के स्वामी हैं, जबकि मेरे लिए तो बस यही संसार ही मेरा एकमात्र सहारा है, मेरे पास और कुछ नहीं। यह श्लोक चतुराई से बताता है कि एक जैसे शब्दों का अर्थ कितना भिन्न हो सकता है।
शब्दांतील फरक
अहं च त्वं च राजेन्द्र लोकनाथावुभावपि । बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठीतत्पुरुषो भवान् ॥
हे राजा, आपण दोघांनाही 'लोकनाथ' म्हटले जाते, पण त्याचा अर्थ वेगळा आहे—तुम्ही खऱ्या अर्थाने जगाचे स्वामी आहात, तर माझ्यासाठी हे जगच माझा एकमेव आधार आहे, माझ्याकडे दुसरे काही नाही. हा श्लोक चातुर्याने दाखवतो की सारखे शब्दही किती वेगळा अर्थ बाळगू शकतात.