A Prayer for Teacher and Student
ॐ सह नाववतु सहनौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।
May the Divine protect both of us — teacher and student — together, and nourish us together. May we work with vigor side by side, may our learning be bright and illuminating, and may we never come to resent one another. This ancient invocation, still recited before study in many traditions, captures the spirit of harmonious learning: teacher and student bound in mutual respect, shared effort, and goodwill.
गुरु-शिष्य की प्रार्थना
ॐ सह नाववतु सहनौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।
ईश्वर हम दोनों — गुरु और शिष्य — की एक साथ रक्षा करें और हम दोनों को एक साथ पोषण दें। हम दोनों मिलकर पुरुषार्थ से कार्य करें, हमारा अध्ययन तेजस्वी और फलदायी हो, तथा हम कभी परस्पर द्वेष न रखें। यह प्राचीन प्रार्थना गुरु-शिष्य के बीच पारस्परिक सम्मान, सहयोग और सद्भावना की भावना को दर्शाती है।
गुरु-शिष्याची प्रार्थना
ॐ सह नाववतु सहनौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।
ईश्वराने आम्हा दोघांचे — गुरु आणि शिष्याचे — एकत्र रक्षण करावे आणि आम्हा दोघांचे पोषण करावे. आम्ही दोघांनी मिळून पुरुषार्थाने कार्य करावे, आमचा अभ्यास तेजस्वी व फलदायी व्हावा, आणि आमच्यात कधीही परस्पर द्वेष निर्माण होऊ नये. ही प्राचीन प्रार्थना गुरु-शिष्यांमधील परस्पर आदर, सहकार्य व सद्भावनेची भावना व्यक्त करते.