Daily Self-Examination
प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत नरश्चरितमात्मनः । किन्नु मे पशुभिस्तुल्यं किन्नु सत्पुरुषैरिति ॥
Every day, one should reflect on one's own conduct and ask: 'Have my actions today resembled those of a mere animal, driven by instinct, or have they resembled those of a truly virtuous person?' This daily self-check is the path to becoming better.
प्रतिदिन आत्म-निरीक्षण
प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत नरश्चरितमात्मनः । किन्नु मे पशुभिस्तुल्यं किन्नु सत्पुरुषैरिति ॥
मनुष्य को प्रतिदिन अपने आचरण की समीक्षा करनी चाहिए और स्वयं से पूछना चाहिए, 'क्या आज मेरा व्यवहार पशुओं जैसा था या सज्जनों जैसा?' यह नियमित आत्म-निरीक्षण ही व्यक्ति को बेहतर बनाता है।
रोजचे आत्मपरीक्षण
प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत नरश्चरितमात्मनः । किन्नु मे पशुभिस्तुल्यं किन्नु सत्पुरुषैरिति ॥
माणसाने दररोज आपल्या वर्तनाचे परीक्षण करावे आणि स्वतःला विचारावे, 'आज माझे वागणे पशूंसारखे होते की सज्जनांसारखे?' हे रोजचे आत्मपरीक्षणच माणसाला अधिक चांगले बनवते.