Knowing Right, Doing Wrong
जानामि धर्मं न च मे प्रवृत्तिः । जानाम्यधर्मं न च मे निवृत्तिः ॥
I know what is right, yet I feel no inclination to do it; I know what is wrong, yet I cannot stop myself from doing it. This is the timeless struggle between knowledge and willpower — knowing the good is not enough without the resolve to act on it.
जानते हुए भी न कर पाना
जानामि धर्मं न च मे प्रवृत्तिः । जानाम्यधर्मं न च मे निवृत्तिः ॥
मैं धर्म को जानता हूँ, फिर भी उसमें मेरी प्रवृत्ति नहीं होती; मैं अधर्म को भी जानता हूँ, फिर भी उससे मैं दूर नहीं रह पाता। यह दिखाता है कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं, उसे अमल में लाने की इच्छाशक्ति भी चाहिए।
जाणूनही न करता येणे
जानामि धर्मं न च मे प्रवृत्तिः । जानाम्यधर्मं न च मे निवृत्तिः ॥
मला धर्म माहीत आहे, तरीही त्याकडे माझी प्रवृत्ती होत नाही; मला अधर्मही माहीत आहे, तरीही त्यापासून मी दूर राहू शकत नाही. यातून हेच दिसते की केवळ ज्ञान पुरेसे नसते, ते आचरणात आणण्याची इच्छाशक्तीही हवी.