Learning Without Values Turns Demon
साक्षराः विपरीताश्चेद्राक्षसाः एव केवलम् । सरसो विपरीतश्चेत्सरसत्वम् न मुञ्चति ॥
A learned person, if their character is inverted or corrupted, becomes nothing but a demon — for the Sanskrit word 'sakshara' (literate) reversed becomes 'rakshasa' (demon). But someone of genuinely good and gracious nature never loses that essential goodness, however life turns against them — true virtue holds steady even when everything else is reversed.
विद्या बिना गुण, राक्षस समान
साक्षराः विपरीताश्चेद्राक्षसाः एव केवलम् । सरसो विपरीतश्चेत्सरसत्वम् न मुञ्चति ॥
विद्वान व्यक्ति यदि विपरीत (बुरे) आचरण वाला हो जाए तो वह मात्र राक्षस के समान रह जाता है — जैसे संस्कृत में 'साक्षर' शब्द को उलटने पर 'राक्षस' बनता है। परंतु जो व्यक्ति सच में सरस (सुहृदय, मधुर स्वभाव वाला) है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपना सरसत्व (मधुरता) नहीं छोड़ता — सच्चा गुण कभी नहीं बदलता।
विद्या पण गुण नाही, राक्षससम
साक्षराः विपरीताश्चेद्राक्षसाः एव केवलम् । सरसो विपरीतश्चेत्सरसत्वम् न मुञ्चति ॥
विद्वान माणूस जर विपरीत (वाईट) आचरणाचा झाला तर तो केवळ राक्षसासारखा उरतो — जसे संस्कृतमध्ये 'साक्षर' शब्द उलटा केला की 'राक्षस' होतो. पण जो खरोखर सरस (गोड, प्रेमळ स्वभावाचा) असतो, तो विपरीत परिस्थितीतही आपले सरसत्व सोडत नाही — खरा गुण कधीच बदलत नाही.