Long Night for the Ignorant
दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घं श्रान्तस्य योजनम् । दीर्घो बालानां संसारः सद्धर्मम् अविजानताम् ॥
The night feels endless to someone lying awake, and a short distance feels endless to someone exhausted; likewise, the cycle of worldly life feels endless to fools who do not understand the true teaching.
अज्ञानी की लंबी रात
दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घं श्रान्तस्य योजनम् । दीर्घो बालानां संसारः सद्धर्मम् अविजानताम् ॥
जागते हुए व्यक्ति को रात लंबी लगती है, थके हुए व्यक्ति को थोड़ी दूरी भी लंबी लगती है; उसी प्रकार सद्धर्म को न समझने वाले मूर्खों को यह संसार-चक्र अंतहीन लगता है।
अज्ञान्याची दीर्घ रात्र
दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घं श्रान्तस्य योजनम् । दीर्घो बालानां संसारः सद्धर्मम् अविजानताम् ॥
जागत राहणाऱ्याला रात्र मोठी वाटते, थकलेल्याला थोडे अंतरही मोठे वाटते; त्याचप्रमाणे खरा धर्म न समजणाऱ्या मूर्खांना हा संसार अंतहीन वाटतो.