Marks of Greatness
विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधि विक्रमः । यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम् ॥
Courage in adversity, forbearance in prosperity, eloquence in an assembly, valor in battle, a love of good reputation, and a passion for learning — these come naturally to truly great souls.
महापुरुषों के स्वाभाविक गुण
विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधि विक्रमः । यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम् ॥
विपत्ति में धैर्य, समृद्धि में क्षमाशीलता, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में पराक्रम, यश की चाह और शास्त्रों के अध्ययन का व्यसन - ये सभी गुण महान आत्माओं में स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं।
महात्म्यांचे स्वाभाविक गुण
विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधि विक्रमः । यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम् ॥
संकटात धैर्य, भरभराटीत क्षमाशीलता, सभेत वाक्पटुत्व, युद्धात पराक्रम, कीर्तीची आवड आणि विद्येचे व्यसन - हे सर्व गुण महान आत्म्यांमध्ये उपजतच असतात.