No Permanent Companions
नेह चात्यन्तसंवासः कर्हिचित् केनचित् सह । राजन् स्वेनापि देहेन किमु जायात्मजादिभिः ॥ श्रीमद्भागवत
In this world, no companionship lasts forever with anyone — not even with one's own body. So what hope is there of eternal togetherness with one's spouse, children, or other loved ones? All bonds here are temporary, so cherish them without clinging.
कोई साथ स्थायी नहीं
नेह चात्यन्तसंवासः कर्हिचित् केनचित् सह । राजन् स्वेनापि देहेन किमु जायात्मजादिभिः ॥ श्रीमद्भागवत
इस संसार में किसी का भी साथ सदा के लिए नहीं रहता - अपने ही शरीर का साथ भी नहीं, तो फिर पत्नी, संतान आदि का साथ कैसे स्थायी हो सकता है? इसलिए सभी रिश्तों को बिना मोह के प्रेमपूर्वक निभाना चाहिए।
कोणाचीच साथ कायम नाही
नेह चात्यन्तसंवासः कर्हिचित् केनचित् सह । राजन् स्वेनापि देहेन किमु जायात्मजादिभिः ॥ श्रीमद्भागवत
या जगात कोणाचीही साथ कायमची टिकत नाही - स्वतःच्या शरीराचीही साथ कायम नसते, मग पत्नी, मुले यांची साथ तरी कायम कशी असेल? म्हणून सर्व नाती आसक्तीविना प्रेमाने जपावीत.