One Slip, All Restraint Lost
यथा हि मलिनैः वस्त्रैः यत्र कुत्र उपविष्यते । वृत्तः चलितोपि एवं शेषं वृत्तं न रक्षति ॥
Just as someone wearing already-soiled clothes will sit down carelessly anywhere without a second thought, a person whose character has slipped even once often stops guarding the rest of their conduct. The lesson: don't let a single lapse become an excuse to abandon virtue altogether.
एक चूक, सारा संयम व्यर्थ
यथा हि मलिनैः वस्त्रैः यत्र कुत्र उपविष्यते । वृत्तः चलितोपि एवं शेषं वृत्तं न रक्षति ॥
जैसे मैले वस्त्र पहने व्यक्ति कहीं भी बेझिझक बैठ जाता है क्योंकि उसे अब गंदे होने की चिंता नहीं रहती, वैसे ही जिसका चरित्र एक बार डगमगा जाता है वह प्रायः शेष आचरण की भी रक्षा करना छोड़ देता है। शिक्षा यही है कि एक भूल को शेष सदाचार त्यागने का बहाना न बनाएं।
एक चूक, संयम सुटतो
यथा हि मलिनैः वस्त्रैः यत्र कुत्र उपविष्यते । वृत्तः चलितोपि एवं शेषं वृत्तं न रक्षति ॥
जसा मळकट कपडे घातलेला माणूस कुठेही बिनधास्त बसतो कारण त्याला आणखी मळण्याची चिंता नसते, तसेच ज्याचे चारित्र्य एकदा ढळते तो अनेकदा उरलेल्या वर्तनाचेही रक्षण करणे सोडून देतो. म्हणून एका चुकीचे निमित्त करून संपूर्ण सदाचार सोडू नये, हाच यातील बोध आहे.