Poison Through and Through
वृश्चिकस्य विषं पृच्छे मक्षिकायाः मुखे विषम् । तक्षकस्य विषं दन्ते सर्वांगे दुर्जनस्य तत् ॥
A scorpion's venom is in its tail, a fly's in its mouth, a snake's in its fangs — each creature's poison stays confined to one place. But a wicked person's malice runs through their entire being, in every word and deed.
दुर्जन का सर्वांगी विष
वृश्चिकस्य विषं पृच्छे मक्षिकायाः मुखे विषम् । तक्षकस्य विषं दन्ते सर्वांगे दुर्जनस्य तत् ॥
बिच्छू का विष उसकी पूँछ में, मक्खी का मुख में, और सर्प का विष उसके दाँतों में होता है। परंतु दुर्जन का विष उसके पूरे शरीर में व्याप्त रहता है — उसकी हर बात और हर कर्म में।
दुर्जनाचे सर्वांगी विष
वृश्चिकस्य विषं पृच्छे मक्षिकायाः मुखे विषम् । तक्षकस्य विषं दन्ते सर्वांगे दुर्जनस्य तत् ॥
विंचवाचे विष शेपटीत, माशीचे तोंडात आणि सापाचे विष दातांत असते. पण दुर्जन माणसाचे विष त्याच्या संपूर्ण शरीरात, म्हणजे प्रत्येक कृतीत आणि बोलण्यात भिनलेले असते.