The Ocean That Hoards, the Cloud That Gives
संग्रहैकपरः प्रायः समुद्रोपि रसातले । दातारं जलदं पश्य गर्जन्तं भुवनोपरी ॥
The ocean, absorbed only in accumulating and hoarding water, remains stuck down in the depths — while the generous cloud, which draws up that very water only to give it away as rain, thunders triumphantly high above the world. The lesson: hoarding keeps you low, but generosity elevates you.
संचय करने वाला सागर, देने वाला मेघ
संग्रहैकपरः प्रायः समुद्रोपि रसातले । दातारं जलदं पश्य गर्जन्तं भुवनोपरी ॥
समुद्र केवल संचय (जल इकट्ठा करने) में लगा रहता है, इसीलिए वह सदा नीचे, पाताल में ही पड़ा रहता है; परंतु देखिए उदार बादल को, जो वही जल वर्षा के रूप में लौटाकर संसार के ऊपर गर्जन करता हुआ शोभायमान होता है। संचय करने वाला नीचे रहता है, देने वाला ऊँचा उठता है — यही इस श्लोक का संदेश है।
साठवणारा सागर, देणारा मेघ
संग्रहैकपरः प्रायः समुद्रोपि रसातले । दातारं जलदं पश्य गर्जन्तं भुवनोपरी ॥
समुद्र फक्त पाणी साठवण्यातच मग्न असतो, म्हणूनच तो कायम खाली, पाताळात पडून राहतो; पण पाहा त्या उदार ढगाला, जो तेच पाणी पावसाच्या रूपात परत देत जगाच्या वर गर्जना करत शोभतो. साठवणारा खाली राहतो, देणारा उंच उठतो — हाच या श्लोकाचा संदेश आहे.