The Proud Chataka's Vow
एक एव खगो मानी चिरंजीवतु चातकम् । म्रियते वा पिपासार्तो याचते वा पुरंदरम् ॥
There is one truly self-respecting bird — long live the chataka! It would rather die of thirst than beg for water from any source other than Indra, the rain-god himself. The chataka stands as a symbol of dignity: better to endure hardship than compromise one's principles for a lesser resort.
चातक का स्वाभिमान
एक एव खगो मानी चिरंजीवतु चातकम् । म्रियते वा पिपासार्तो याचते वा पुरंदरम् ॥
संसार में केवल एक ही पक्षी सच्चा स्वाभिमानी है — चातक चिरंजीवी रहे! वह प्यास से व्याकुल होकर मर जाना स्वीकार करता है, परंतु इंद्र (वर्षा के देवता) के अतिरिक्त किसी और स्रोत से जल माँगना उसे स्वीकार नहीं। चातक स्वाभिमान और सिद्धांतों पर अडिग रहने का प्रतीक है।
चातकाचा स्वाभिमान
एक एव खगो मानी चिरंजीवतु चातकम् । म्रियते वा पिपासार्तो याचते वा पुरंदरम् ॥
जगात केवळ एकच पक्षी खरा स्वाभिमानी आहे — चातक चिरंजीव राहो! तो तहानेने व्याकूळ होऊन मरणे पत्करतो, पण इंद्राशिवाय (पर्जन्यदेवाशिवाय) इतर कोणाकडूनही पाणी मागत नाही. चातक हा स्वाभिमान व तत्त्वांशी ठाम राहण्याचे प्रतीक आहे.