Timeless Teacher's Advice
सत्यं वद धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः । आचार्याय प्रियं धनमाहृत्य प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः ॥
Speak the truth, walk the path of righteousness, and never neglect your daily study. After giving your teacher a fitting gift in gratitude, go on to build a family and continue the thread of life without breaking it. (From the Taittiriya Upanishad's convocation address.)
गुरु का उपदेश
सत्यं वद धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः । आचार्याय प्रियं धनमाहृत्य प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः ॥
सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, स्वाध्याय में आलस्य मत करो। गुरु को उचित धन-भेंट देकर, आगे संतान परंपरा (प्रजातंतु) को मत तोड़ो। (तैत्तिरीय उपनिषद् की दीक्षांत वाणी)
गुरूंचा उपदेश
सत्यं वद धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः । आचार्याय प्रियं धनमाहृत्य प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः ॥
सत्य बोल, धर्माचरण कर, स्वाध्यायात आळस करू नकोस. गुरूंना योग्य धन-भेट देऊन पुढे संततीची परंपरा (प्रजातंतू) तोडू नकोस. (तैत्तिरीय उपनिषदाची दीक्षांत वाणी)