Undeterred Till the Goal
रत्नैः महार्हैः तुतुषुः न देवाः । न भेजिरे भीमविषेण भीतिम् ॥ अमृतं विना न प्रययुः विरामम् । न निश्चदार्थात् विरमंति धीराः ॥
When the gods churned the ocean, they were not content with the precious jewels that emerged, nor did they retreat in fear of the terrible poison; they did not rest until they obtained the nectar of immortality. In the same way, resolute people never abandon a goal they have set their mind to, whatever obstacles or temptations appear along the way.
लक्ष्य तक अडिग
रत्नैः महार्हैः तुतुषुः न देवाः । न भेजिरे भीमविषेण भीतिम् ॥ अमृतं विना न प्रययुः विरामम् । न निश्चदार्थात् विरमंति धीराः ॥
समुद्र मंथन में देवता बहुमूल्य रत्नों से संतुष्ट नहीं हुए, न ही भयंकर विष से डरे; वे तब तक नहीं रुके जब तक अमृत नहीं मिला। इसी तरह धीर पुरुष अपने निश्चित लक्ष्य से तब तक विचलित नहीं होते जब तक वह पूरा न हो जाए।
ध्येयापर्यंत अढळ
रत्नैः महार्हैः तुतुषुः न देवाः । न भेजिरे भीमविषेण भीतिम् ॥ अमृतं विना न प्रययुः विरामम् । न निश्चदार्थात् विरमंति धीराः ॥
समुद्रमंथनात देव मौल्यवान रत्नांनी समाधानी झाले नाहीत, ना भयंकर विषाला घाबरले; अमृत मिळेपर्यंत ते थांबले नाहीत. त्याचप्रमाणे धीर पुरुष आपल्या निश्चित ध्येयापासून ते पूर्ण होईपर्यंत विचलित होत नाहीत.