Used Boats and Fair-Weather Friends
कार्यार्थी भजते लोकम् यावत्कार्यं न सिद्धति । उत्तीर्णे च परे पारे नौकायाम् किं प्रयोजनम् ॥
A person in need is attentive and courteous only until their purpose is served — much like a boat is valued only until the river is crossed, then abandoned on the far shore. The verse cautions us to notice when someone's warmth is really just need in disguise, and to value people beyond what they can do for us.
काम निकलते ही किनारा
कार्यार्थी भजते लोकम् यावत्कार्यं न सिद्धति । उत्तीर्णे च परे पारे नौकायाम् किं प्रयोजनम् ॥
स्वार्थी व्यक्ति तब तक ही दूसरों की खुशामद करता है जब तक उसका काम पूरा नहीं हो जाता; जैसे नदी पार करने के बाद नाव की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। यह श्लोक हमें स्वार्थपूर्ण रिश्तों के प्रति सचेत करता है और सिखाता है कि लोगों का मूल्य केवल उनके उपयोग से नहीं आँकना चाहिए।
काम झाले, नाव विसरली
कार्यार्थी भजते लोकम् यावत्कार्यं न सिद्धति । उत्तीर्णे च परे पारे नौकायाम् किं प्रयोजनम् ॥
स्वार्थी माणूस तोपर्यंतच इतरांची खुशामत करतो जोपर्यंत त्याचे काम पूर्ण होत नाही; जसे नदी ओलांडल्यावर नावेची गरज उरत नाही. हा श्लोक आपल्याला स्वार्थी नात्यांविषयी सावध करतो आणि लोकांचे मूल्य केवळ उपयोगितेवरून न ठरवण्याची शिकवण देतो.