Where Prosperity Comes Unbidden
मूर्खा यत्र न पूज्यते धान्यं यत्र सुसंचितम् । दंपत्यो कलहः नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागतः ॥
In a home where foolishness is not glorified, where food and resources are managed wisely, and where husband and wife live without discord, prosperity arrives entirely on its own, without being invited or sought.
लक्ष्मी स्वयं कहाँ आती है
मूर्खा यत्र न पूज्यते धान्यं यत्र सुसंचितम् । दंपत्यो कलहः नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागतः ॥
जहाँ मूर्खता का सम्मान नहीं होता, जहाँ अन्न-धान्य का संचय सुव्यवस्थित रहता है, और जहाँ पति-पत्नी के बीच कलह नहीं होता — वहाँ लक्ष्मी बिना बुलाए स्वयं ही आ जाती है।
लक्ष्मी स्वतः कुठे येते
मूर्खा यत्र न पूज्यते धान्यं यत्र सुसंचितम् । दंपत्यो कलहः नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागतः ॥
जिथे मूर्खतेला मान दिला जात नाही, जिथे धान्याचा साठा सुव्यवस्थित असतो, आणि जिथे पती-पत्नीमध्ये कलह नसतो — तिथे लक्ष्मी स्वतःहून, न बोलावता येते.